July 10, 2025

हमेशा से ठगी जाने वाली — नारी!


जो पढ़ना जानती थी,

वे प्रेमपत्रों से ठगी गई,

जो नहीं जानती थी

वे एक जोड़ी झुमकों से।


चटोरपन की मारी

एक प्लेट चाऊमिन से,

‘तेरे हाथों में स्वाद है’

सुनकर ठगी गई वे सारी

जो पढ़कर भी पकड़ नहीं पाई

इतिहास का सबसे बड़ा झूठ।


प्रेम में केवल ईश्वर को साक्षी मानने वाली

एक चुराई अलसाई दोपहरी में मिले

एक चुटकी सिंदूर से ठगी गई।


घर-बाहर दोनों संभालने वाली

चाभियों के एक अदद गुच्छे‌ से..


ठगी की मारी ये सारी की सारी

तब तक खिली रही जबतक

प्रेम का वृक्ष ठूंठ हो उनकी देह के साथ नहीं जला।


* ठगे जाने का सिलसिला अभी तक जारी है......


बाकि झूठे सच्चे  'आई लव यू ' सुनकर ठगी जाती हीं रही हैं हमेशा से....







चलते हैं फिर... अगले ब्लॉग में मुलाक़ात होगी।


तब तक के लिए, अपना ख्याल रखें, मुस्कुराते रहें, और दिल से जिएं। ।

.... अनु


Dilly Dally की बातों में थोड़ा नमक है, थोड़ा कटाक्ष — पर झूठ नहीं!"
लेखिका: अनुपमा सिंह

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